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माघ माह में करें मां गंगा के इस स्तोत्र का पाठ, होगा समस्त पापों का नाश
पुराणों में माघ माह को अत्यंत पवित्र और मोक्षदायक कहा गया है। माघ माह में गंगा स्नान कर मां गंगा की स्तुति और इस स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। शंकराचार्य रचित यह गंगा स्तोत्र पापनाशक और मोक्षदायक है।

संकट चौथ पर बन रहा है विशिष्ट संयोग, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त
संकट का व्रत 21 जनवरी को रखा जाएगा। इस साल सकट व्रत के दिन विशिष्ट संयोग का निर्माण हो रहा है जो कि पूजन के लिए विशेष फलदायी है।

आज से शुरू हो रहा है माघ माह? जानिए इस माह का पौराणिक महात्म
हिंदू धर्म में हर महीने का अपना विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हिंदु धर्म में माघ महीने को पवित्र महीना माना जाता है।

संत कबीर ने दुनिया को पढ़ाया एकता का पाठ
कबीर साहेब का प्राकट्य सन 1398 (संवत 1455), ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा को ब्रह्ममूहर्त के समय कमल के पुष्प पर हुआ था. कबीर जी के संबंध में भ्रांति हैं कि उन्होंने एक विधवा ब्राह्मणी के गर्भ से जन्म लिया था. लेकिन यह असत्य है।

पौष पूर्णिमा पर ऐसे करें मां लक्ष्मी का पूजन, होगा धन लाभ
17 जनवरी को पौष पूर्णिमा है। हिंदी पंचांग के अनुसार, पौष पूर्णिमा तिथि 17 जनवरी को देर रात 3 बजकर 18 मिनट से शुरू होकर 18 जनवरी को सुबह 5 बजकर 17 मिनट पर समाप्त होगी।

मकर संक्रांति के दिन सूर्यदेव और शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए करें ये उपाय
सनातन धर्म में मकर संक्रांति का विशेष महत्व है। इस दिन सूर्य उत्तरायण और खरमास समाप्त होता है। धार्मिक मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन राजा सगर के पुत्रों को मोक्ष दिलाने हेतु मां गंगा धरती पर प्रकट हुई थी।

पौष पुत्रदा एकादशी पर है विशेष संयोग जानें-पूजा की विधि और मुहूर्त
गुरुवार का दिन भगवान श्रीहरि विष्णु जी को समर्पित होता है। इस दिन भगवान श्रीहरि विष्णु जी की पूजा-उपासना करने से घर में सुख, समृद्धि का आगमन होता है।

13 जनवरी को मनाई जाएगी लोहड़ी
लोहड़ी का पर्व उत्तर भारत, खासतौर पर पंजाब, हरियाणा और हिमाचल के क्षेत्र में धूम-धाम से मनाया जाता है।

प्रेम व भाईचारे की मिसाल कायम करती लोहड़ी
उत्तर भारत में मनाया जाने वाला प्रमुख पर्व है लोहड़ी। पंजाब, हरियाणा तथा हिमाचल प्रदेश में खासतौर से पंजाबी समुदाय में तो इस पर्व पर एक अलग ही उत्साह देखा जाता है।

रामराज्य, समता एवं समानता का शिखर है
रामराज्य में न तो कोई दरिद्र था, न कोई दुखी था और न ही कोई दीनता से ग्रस्त था।