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भारतीय नारी कब तक रहेगी बेचारी
नारी का नारी के लिये सकारात्मक दृष्टिकोण न होने का ही परिणाम है कि पुरुष उसका पीढ़ी-दर-पीढ़ी शोषण करता आ रहा हैं। इसी कारण नारी में हीनता एवं पराधीनता के संस्कार संक्रान्त होते रहे हैं। जिन नारियों में नारी समाज की दयनीय दशा के प्रति थोड़ी भी सहानुभूति न
यूपी : सपा-कांग्रेस की बेताबी और बसपा की बेरूखी वाली सियासत
उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव में अब साल भर का समय बचा है। सभी राजनैतिक पार्टियां एड़ी-चोटी का जोर लगाए हुए हैं।
वंचितों की आकांक्षा पूर्ति से ही आएंगे अच्छे दिन
परिवर्तन के बिना कोई क्रांति नहीं हो सकती। राजनीति, अर्थव्यवस्था या समाज का चेहरा बदलने के लिए क्रांति आह्वान करना ही पड़ता है।
लोकतांत्रिक पूंजीवाद सुनिश्चित हो
पिछले हफ्ते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वह कहा, जो पहले किसी प्रधानमंत्री ने नहीं कहा था. उन्होंने घोषणा की, 'कारोबार में रहना सरकार का कारोबार नहीं है।Ó उन्होंने साफ कह दिया कि निजी क्षेत्र को भला-बुरा कहना अब स्वीकार्य नहीं है। अपने चिर-परिचित आधुनिक र
निजीकरण की घर वापसी, कम करना होगा कर्ज और घाटे का स्तर
राजनीतिक रूप से ज्वलनशील मुहावरा 'निजीकरणÓ एक बार फिर से सार्वजनिक बहस में लौट आया है। आम तौर पर इतिहास पर नजर डालें, तो यह मुहावरा और निजीकरण का विचार राजनीतिक लाभ के साथ घटता-बढ़ता रहता है।
मां सीता के बिना अधूरे हैं प्रभु श्रीराम
पौराणिक काल में ऐसी कई महिलाएं हुई हैं जिन्हें हम आदर्श और उत्तम चरित्र की महिलाएं मानते हैं, जो भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर हैं। लेकिन उनमें से सर्वोत्तम हैं माता सीता। जैसे श्रीराम को पुरुषों में उत्तम पुरुषोत्तम कहा गया है, उसी तरह माता सीता भी महि
खिलौना उद्योग को नई रफ्तार देने की कवायद में मील का पत्थर साबित होगा 'भारत खिलौना मेलाÓ 2021
हाथों में मोबाइल लेकर पैदा होने वाली हमारी नई नस्ल, हमारे नए पौध में खिलौनों से वास्ता लगातार कम होता जा रहा है। बच्चे ऑनलाइन खेल और खिलौनों की ओर बेतहाशा बढ़ रहे हैं। बच्चे सबसे ज्यादा समय वीडियो गेम और मोबाइल के अन्यान्य गतिविधियों में बिताने लगे हैं।
पाकिस्तान के साथ कितना स्थायी होगा संघर्ष विराम
इस संघर्ष विराम समझौते ने यह दिखाया है कि हमारा राष्ट्रीय सुरक्षा प्रतिष्ठान न केवल चीन और पाकिस्तान द्वारा पेश की चुनौतियों का मुकाबला करने की क्षमता रखता है, बल्कि यह इन दोनों उद्दंड पड़ोसियों के साथ समझौता कर पाने में भी सक्षम है।
राजनीति राष्ट्रनिर्माण की दीर्घकालीन तप साधना है, आरोप-प्रत्यारोप का खेल नहीं
भरत के वैभव का अनुष्ठान राजनीति है। राष्ट्रजीवन से जुड़े आदर्शों के बिना लोकतांत्रिक राजनीति संभव नहीं। संविधान निर्माताओं ने पूरी राजव्यवस्था का चित्र बनाया है। संविधान में अनेक संस्थाएं हैं। उनका सम्मान सबका कर्तव्य है। संसदीय जनतंत्र में राजनीतिक विचार