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स्वास्थ्य बजट 2021-22 : सही दिशा में उठाया गया कदम
स्वास्थ्य-देखभाल, दुर्भाग्यपूर्ण महामारी के कारण दैनिक जीवन के केंद्र में आ गया है। इस वैश्विक महामारी ने दुनिया भर में जीवन और आजीविका को तबाह कर दिया है।
जाहे विधि राखे राम, ताहि विधि रहिए
पिछले दिनों किसान आंदोलन के बीच पंजाब में स्थानीय निकायों के चुनाव संपन्न हुए। इसमें कांग्रेस पार्टी की अकाल्पनिक विजय इतनी महत्वपूर्ण नहीं थी जितनी कि भारतीय जनता पार्टी की फज़़ीहत के साथ बुरी तरह हुई पराजय।
अपने आखिरी वक्त में भी धर्म उपदेश देते रहे थे रामकृष्ण परमहंस
विश्व में वेदांत का झंडा फहराने वाले स्वमी विवेकानंद जैसे महापुरुष के गुरुदेव स्वामी रामकृष्ण परमहंस के विषय में कुछ लिखना ईश्वर में पूर्णत: समाहित होने जैसा है। एक महामानव का जीवन परिचय जानना और समझना कितना कठिन है,
साल खत्म हुआ है, कोरोना वायरस नहीं
2020, इस साल ने हमें पूरी एक सदी का सबक दे दिया, हमने समझा कि प्रकृति का महत्व क्या है, इस बरस हमने सही मायनों में जान की कीमत को समझा। हमने जाना कि अपनों को खोने का दर्द क्या होता है और अपनों के करीब होने का सुख क्या होता है। लेकिन यह सारा अनुभव तभी संभव
किसान आन्दोलन पर देशद्रोह एवं अशांति के धब्बे
सर्वोच्च न्यायालय ने जन-प्रदर्शनों, आन्दोलनों, बन्द, रास्ता जाम, रेल रोकों जैसी स्थितियों के बारे में जो ताजा फैसला किया है, उस पर लोकतांत्रिक मूल्यों की दृष्टि से गंभीर चिन्तन होना चाहिए, नयी व्यवस्थाएं बननी चाहिए।
मोदी को मिटाते-मिटाते, गांधी परिवार न निपट जाए
गांधी परिवार लगातार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनकी सरकार पर हमलावर है। इसी के चलते मोदी सरकार के हर फैसले पर उंगली उठाई जाती है।
दुनिया में ग्रीन रिकवरी के लिए कैटेलिस्ट बनेगा अमेरिका
ग्रीन स्टीमुलस इंडेक्स की ताज़ा रिपोर्ट की मानें तो कोविड महामारी के दौरान और अमेरिका में बिडेन के राष्ट्रपति बनने के बाद अब ऐसा माना जा सकता है कि दुनिया भर में ग्रीन रिकवरी की शुरुआत अमेरिका के नेतृत्व में हो सकती है। नेतृत्व से ज़्यादा यहाँ अमेरिका की
हाय मंहगाई - तुझे क्यों मौत न आई ?
2014 से अभी तक जिस 'अच्छे दिन आने वाले हैं ' जैसे लोक लुभावन नारे का इंतज़ार देश की आम जनता को था वह शायद आ चुके हैं।
राजनीतिक दलों का लोकतंत्र से कम होता भरोसा
हमारे देश में लोकतांत्रिक प्रणाली लागू है,जिसके माध्यम से हम भारतीय नागरिक अपने जनप्रतिनिधि चुनते हैं,किंत बड़े दुख की बात है
संवेदनाओं से भरा राजनीतिक संवाद
संवेदनशीलता विशिष्ट मानवीय गुण है जो भावुकता में अभिव्यक्त होता है। यह नैसर्गिक है। इसे सप्रयास अर्जित नहीं किया जा सकता। कभी-कभी अनायास अंतर्मन में आत्मभाव के मेघ उठते हैं। चित्त मधुमयता से भर जाता है,