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समस्या ‘किसान आन्दोलन’ नहीं ‘काली राजनीति’ है
देश में बीस दिनों से किसान आंदोलन चल रहा है, किसान भड़के हुए हैं और आंदोलनरत है तो वहीं इनकी वजह से लाखों लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही आंदोलन और बंद की वजह से देश की अर्थव्यवस्था को भी हजारों करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है।
हुनर हाट में होंगे लोकल से वोकल के रंग, स्वदेशी हस्तनिर्मित उत्पादों के रंग फिर से बिखेरने लगे हैं
पांच लाख से ज्यादा भारतीय दस्तकारों और शिल्पकारों को रोजगार के मौके देने वाले हुनर हाट के दुर्लभ हस्तनिर्मित स्वदेशी सामान का जादू लोगों के सिर चढ़ कर बोल रहा है। यह बात दीगर है, कोरोना की काली छाया के चलते छह महीने हुनर हाट पर भी ग्रहण लगा। रफ्ता-रफ्ता
उत्कृष्ट एवं गौरवशाली संसदीय परंपराओं के ध्वजवाहक हैं डाॅ. चरणदास महंत
सरल, सहज, सौम्य एवं कुशल राजनेता, एक कृषक, समाजवादी विचारक, साहित्यकार, विधायक, सांसद, मंत्री, केन्द्रीय मंत्री और अब विधान सभा अध्यक्ष, अपने लम्बे राजनीतिक जीवन में विभिन्न दायित्वों एवं जिम्मेदारियों का सफलता पूर्वक निर्वहन करने वाले डाॅ. महंत का जन्म
भ्रष्टाचार: एक प्रकार का देशद्रोह है
हमारे देश में ईमानदारी संवैधानिक नियमानुसार कार्यवाही ना कर- कार्य करने के बदले में पैसों की या अन्य सुविधाओं की मांग करना भ्रष्टाचार है- भ्रष्टाचार की जड़ें हमारे देश मै बहुत गहरे तक जमी हुई है, इस भ्रष्टाचार रूपी कुकृत्य को उखाड़ फेंकने के लिए हमारे दे
हर पल एक नई शुरुआत संभव है, हमें जीवन को नया आयाम देना होगा
रोना महाव्याधि एवं संकट से संघर्ष करते हुए हम बहुत टूट गये हैं, निराशाजनक एवं नकारात्मक शक्तियों से घिर गये हैं। इन स्थितियों से उपरत होने के लिये एवं जीवन को सफल एवं सार्थक बनाने के लिये हमें जीवन को नया आयाम देना होगा। स्वयं की शक्ति को पहचानना होगा, आत
बिहार में सियासत के नए सारथी हैं चिराग
बिहार में सियासत हर पल रंग बदल रही है। एक तरफ चार-चार गठबंधन तो दूसरी ओर बिहार की राजनीति के चतुर खिलाड़ी रहे श्री रामविलास पासवान के बेटे लोक जनशक्ति पार्टी-लोजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री चिराग पासवान चुनावी दंगल में अकेले दम पर जमे हैं, लेकिन चिराग के
सामुदायिक संक्रमण, वैक्सीन, कोरोना की विदाई
भारत में कोरोना संक्रमण के कहर को झेल रही जिन्दगी बड़े कठोर दौर के बाद अब सामान्य होने की कगार पर दिखाई दे रही है। वैज्ञानिकों की नेशनल सुपर मॉडल समिति ने दावा किया है कि देश में कोरोना का चरम सितम्बर में ही आ चुका था और फरवरी 2021 में कोरोना का वायरस फ्लै
योजनाओं के केन्द्र में कौन? गरीब या सत्ता?
कोरोना महामारी के कारण अस्तव्यस्त हुई अर्थ-व्यवस्था एवं जीवन निर्वाह के संकट से गरीबी बढ़ी है। गरीबी पहले भी अभिशाप थी लेकिन अब यह संकट और गहराया है। गरीबी केवल भारत की ही नहीं, बल्कि दुनिया की एक बड़ी समस्या है। दुनियाभर में फैली गरीबी के निराकरण के लिए ही
अर्थव्यवस्था में प्राण फूंकने का तीसरा पैकेज
कोरोना महामारी के कारण अस्तव्यस्त हुई अर्थ व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिये केन्द्र सरकार की ओर से एक बार फिर प्रोत्साहन पैकेज घोषित किये गये हैं, यह पैकेज सुस्त अर्थ-व्यवस्था को स्पंदन एवं गति देने कितने सहायक होंगे, यह भविष्य के गर्भ में हैं। लेकिन उसका
सामयिक व्यंग्य: ऐसे तो महंगा पड़ जाएगा 'फ्री' का हरी मिर्च और धनिया
सुबह-सुबह घर के आगे बैठ अखबार की सुर्खियां पढ़ रहा था। इसी दौरान हमारे एक पड़ोसी धनीराम जी का आना हो गया। मिलनसार प्रवृत्ति के धनीराम जी शासकीय कर्मचारी हैं। हर किसी को अपना बनाते वे देर नहीं लगाते हैं। रेहड़ी-खोमचे वाले से लेकर जिसे भी इनके घर के आगे से गुज