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उच्च मानवीय मानसिकता ही विश्व कल्याणकारी है
विश्व कल्याण के लिए हमारी मानवीय आधार पर बिना किसी जातिगत एवं धर्मगत, पंथगत हमारी सोच बिना किसी धार्मिक कट्टरता के और हमारे कृत्य ही विश्व के लिए कल्याणकारी है,
धार्मिक कट्टरता और जातिवाद देश के विकास में सबसे बड़ी रुकावट
हमारा देश एक धर्मनिरपेक्ष देश है क्या हमने अपने संविधान को ठीक से पढ़ा है। अगर नहीं तो हम कैसे कह सकते हैं कि हमारा देश एक धर्मनिरपेक्ष देश है। हमारे देश के विकास में सबसे बड़ी बाधक हमारे देश के धर्मों की कट्टरता है।
आचार्य महाश्रमण ने रचा अहिंसा यात्रा का स्वर्णिम इतिहास
दिल्ली में राष्ट्रीय गौरव दिवस पर हिंसा, अराजकता एवं उपद्रव का जहां एक काला पृष्ठ रचा गया, वही दूसरी ओर सुदीर्घ लम्बी पदयात्राओं के निमित्त से आयोज्य आचार्य श्री महाश्रमण की 'अहिंसा यात्राÓ ने हिंसा, अराजकता और युद्ध के माहौल में अहिंसक जीवनशैली, अहिंसा क
सशस्त्र बलों में महिलाओं के लिए समान अवसर
वैसे तो, भारतीय रक्षा बलों में महिलाओं का प्रवेश ब्रिटिश भारत के समय से ही अलग-अलग स्तर पर रहा है, उनकी भूमिका नर्सिंग और चिकित्सा अधिकारियों से संबंधित ज्यादा थी या तैनाती के दौरान सैनिकों, परिवार और जनता की देखभाल करने की जिम्मेदारी होती थी।
किसान आंदोलन का हिंसक एवं अराजक हश्र
किसान आन्दोलन तथा विभिन्न विचारों, मान्यताओं के विघटनकारी दलों के घालमेल की राजनीति ने भारत के गणतंत्र को शर्मसार किया।
बालिकाओं को सशक्त बनाना एक सुदृढ़ वैज्ञानिक नेतृत्व का विकास करना है
इस वर्ष हमने राष्ट्रीय बालिका दिवस बिल्कुल ही अलग माहौल में मनाया। महामारी ने बुनियादी सेवाओं के नए तौर-तरीके से लेकर शिक्षा के नए मॉडल तक लोगों के जीवन को पूरी तरह बदल दिया।
राष्ट्रीय उजालों का स्वागत ही गणतंत्र दिवस का संकल्प
इक्कहतर वर्षों के बाद आज हमारा गणतंत्र कितनी ही कंटीली झाडिय़ों से बाहर निकलकर अपनी गौरवमय उपस्थिति का अहसास करा रहा है।
रक्षा क्षेत्र में बढ़ती भारत की आत्मनिर्भरता हमारे सैन्य बलों को और सशक्त बनाएगी
देशी 'भारत ड्रोनÓ जो पूर्वी लद्दाख के पास एलएसी की निगरानी के लिए रखा जा रहा है उसे राडार की पकड़ में लाना असंभव है।
इच्छाओं से भी कीजिए संवाद
च्छा की जन्म स्थली मन है। मन ही मनुष्य को पशु-पक्षियों से भिन्न करता है। इच्छा हमेशा लोभ के मार्ग पर अग्रसर होने के लिए प्रेरित करती है, इसीलिए कहा गया हैं -लोभ पाप का मूल है क्योंकि इसी के वशीभूत होकर इंसान से अनुचित, गैर सैद्धान्तिक और अन्याय पूर्ण का
उजालों पर कालिख पोतने का 'तांडवÓ
देश में लगातार हिन्दू धर्म एवं उसके देवताओं का उपहास उडाया जाता रहा है, जबकि दूसरे धर्म एवं उनके देवताओं के साथ ऐसा होने पर उसे लोकतांत्रिक मूल्यों का हनन करार दिया गया, यह विरोधाभास एवं विडम्बना आखिर हिन्दू समाज कब तक झेले? एक बार फिर वेब सीरीज तांडव मे